प्राकृतिक आपदाएँ (Natural Hazards) कोर्स | IIT कानपुर NPTEL | भूकंप, सुनामी, भूस्खलन
Course Details
| Exam Registration | 117 |
|---|---|
| Course Status | Ongoing |
| Course Type | Core |
| Language | English |
| Duration | 12 weeks |
| Categories | Civil Engineering, Energy, Climate and Sustainability, Earth Sciences |
| Credit Points | 3 |
| Level | Undergraduate/Postgraduate |
| Start Date | 19 Jan 2026 |
| End Date | 10 Apr 2026 |
| Enrollment Ends | 02 Feb 2026 |
| Exam Registration Ends | 20 Feb 2026 |
| Exam Date | 19 Apr 2026 IST |
| NCrF Level | 4.5 — 8.0 |
प्राकृतिक आपदाएँ (Natural Hazards): IIT कानपुर से एक व्यापक मार्गदर्शिका
प्राकृतिक आपदाएँ मानव सभ्यता के लिए सदैव एक बड़ी चुनौती रही हैं। इनकी समझ और प्रबंधन आज के समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में से एक है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर, NPTEL के माध्यम से, प्रोफेसर जावेद एन. मलिक द्वारा पढ़ाए जाने वाले एक विशेष ऑनलाइन पाठ्यक्रम की पेशकश कर रहा है, जो इन आपदाओं की गहन समझ प्रदान करता है। यह 12-सप्ताह का कोर्स स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों के लिए एक उत्कृष्ट अवसर है।
पाठ्यक्रम के बारे में
"प्राकृतिक आपदाएँ" पाठ्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न प्राकृतिक खतरों, जैसे भूकंप, भूस्खलन, बाढ़, सुनामी, ज्वालामुखी विस्फोट, तूफान और चक्रवात के घटना तंत्र, कारणों और प्रभावों की विस्तृत जानकारी प्रदान करना है। यह कोर्स न केवल इन आपदाओं के वैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डालता है, बल्कि जमीन की विरूपण, भू-स्तर में परिवर्तन, घटना पुनरावृत्ति अंतराल और इनसे जुड़े जोखिमों के आकलन व शमन पर भी ध्यान केंद्रित करता है।
प्रोफेसर जावेद एन. मलिक: एक परिचय
इस पाठ्यक्रम के प्रशिक्षक, प्रो. जावेद एन. मलिक, IIT कानपुर में एक प्रतिष्ठित भूवैज्ञानिक हैं। उनकी शैक्षणिक और शोध पृष्ठभूमि इस विषय को पढ़ाने के लिए उन्हें एक आदर्श विशेषज्ञ बनाती है:
- शिक्षा: पीएच.डी. (भूविज्ञान), एम.एस. यूनिवर्सिटी बड़ौदा, 1998।
- पोस्ट-डॉक्टरेट: जापान सोसाइटी फॉर प्रमोशन ऑफ साइंस (JSPS) के तहत हिरोशिमा यूनिवर्सिटी, जापान (1999-2001) से।
- विशेषज्ञता के क्षेत्र: सक्रिय टेक्टोनिक्स, पुरा-भूकंप विज्ञान (Paleoseismology) और पुरा-सुनामी अध्ययन।
- वर्तमान शोध: उत्तर-पश्चिम हिमालय और कच्छ में सक्रिय भ्रंश मानचित्रण; अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पुरा-सुनामी अध्ययन; भूकंप व सुनामी अध्ययन के लिए जापान, अमेरिका और फ्रांस के साथ सहयोग।
पाठ्यक्रम संरचना (12 सप्ताह)
| सप्ताह | विषय सामग्री |
|---|---|
| सप्ताह 1-2 | प्राकृतिक खतरों और आपदाओं का अवलोकन, परिभाषा, प्रकार, मानवीय प्रभाव, भविष्यवाणी और शमन रणनीतियाँ। |
| सप्ताह 3-4 | पृथ्वी की संरचना, प्लेट टेक्टोनिक्स सिद्धांत, प्लेट सीमाओं के प्रकार और भूकंप, ज्वालामुखी, सुनामी जैसी आपदाओं से संबंध। |
| सप्ताह 5-6 | भूकंप की उत्पत्ति और तंत्र, भूकंपीय तरंगें, पुनरावृत्ति अंतराल, भू-विरूपण, विश्व के भूकंप-प्रवण क्षेत्र। |
| सप्ताह 6-7 | सुनामी की उत्पत्ति और तंत्र, तटीय प्रभाव, कटाव-निक्षेप, चेतावनी प्रणाली और जोखिम आकलन। |
| सप्ताह 8-9 | ज्वालामुखी विस्फोट के प्रकार और कारण, ज्वालामुखीय खतरे, टेक्टोनिक वातावरण से संबंध, जोखिम आकलन व शमन। |
| सप्ताह 10 | भूस्खलन के कारण और प्रकार, द्रव्यमान अभिगमन प्रक्रियाएँ, भू-धंसाव, पहाड़ी भूभागों पर प्रभाव, जोखिम आकलन। |
| सप्ताह 11 | बाढ़ के कारण और प्रकार, मानवीय अंतःक्रिया, बाढ़ आवृत्ति, बाढ़ मैदान गतिकी, न्यूनीकरण उपाय। |
| सप्ताह 12 | तूफान और चक्रवात का निर्माण व प्रकार, विभिन्न भूदृश्यों पर प्रभाव, उष्णकटिबंधीय चक्रवात, हरिकेन, टोर्नेडो, जंगल की आग। |
कोर्स के लिए पुस्तकें (संदर्भ ग्रंथ)
- Monroe, J.S., Wicander, R., & Hazlett, R. (2007). Physical Geology: Exploring the Earth. (6th Ed.)
- Strahler, A. Introduction to Physical Geology. John Wiley & Sons.
- Hyndman, D., & Hyndman, D. (2011). Natural Hazards and Disasters. (3rd Ed.)
- Keller, E.D. (2012). Introduction to Environmental Geology. Prentice Hall.
पाठ्यक्रम की विशेषताएं एवं लाभ
लक्षित श्रोता: विज्ञान और इंजीनियरिंग के स्नातकोत्तर छात्र। उन्नत स्नातक छात्र भी इस कोर्स को ले सकते हैं।
पूर्वापेक्षाएँ: पृथ्वी विज्ञान या प्राकृतिक आपदाओं का बुनियादी ज्ञान अनुशंसित है। NPTEL के "Earth Sciences For Civil Engineering" कोर्स (भाग I & II) पहले करना फायदेमंद होगा।
उद्योग समर्थन: बुनियादी ढांचे के विकास (इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट) में शामिल कोई भी कंपनी इस कोर्स के ज्ञान को महत्व देती है।
यह पाठ्यक्रम न केवल सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान करता है, बल्कि प्रोफेसर मलिक के व्यापक फील्ड अनुभव और अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग के माध्यम से वास्तविक दुनिया के केस स्टडीज और आधुनिक आकलन तकनीकों से भी परिचित कराता है। आपदा प्रबंधन, पर्यावरण अध्ययन, नगर नियोजन, सिविल इंजीनियरिंग और भूविज्ञान के क्षेत्र में रुचि रखने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए यह एक अनमोल संसाधन है।
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